लाशों के उस ढेर में और एक लाश आ पडी| मौत से पहले ही नमाजे-जनाजे पे चल पडी|| अब तक हुए दर्द को, वो अब सह ना सकी| मौला मुझें उठालो, चिल्ला के रो पडी|| न उसके हाथों मे जान थी, न आखों में रौशनी| जले हुए जिस्म से, बस चिपकी थी एक ओढनी|| जिसके [...]
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‘दर्दे-जलन’
Posted in हिंदी on फेब्रुवारी 5, 2008 | Leave a Comment »
‘इंतजार’
Posted in हिंदी on फेब्रुवारी 5, 2008 | Leave a Comment »
बडी आस लेकर आये थे, हम आपसे मिलने के लिए| लेकिन किस्मत ने हमे ,इंतजार में तडफानाही पसंद किया|| अब भी आखें तरसी है ,आपका दीदारें सुरमा लगाने के लिए| पैरों में आज भी ठंडक है,आपके साथ पुलसिरात पे चलने के लिए|| अब भी ओठो पे नमी है,आपको पुकारने के लिए| सासों में आज भी [...]